ये हमारा राष्ट्र जिसे मध्य एशियन्स के ‘स’ को ‘ह’ उच्चारित करने की वजह से हिन्दुस्थान
भी कहा जाता है| इसे परंपरागत सीमओं ने कभी भी परिभाषित नहीं
किया| जो लोग इसको विभिन्न छोटे छोटे देशो का एक समूह मानते हैं वे कुछ हद तक सही हैं| असल में मौर्य सम्राज्य के विघटन के बाद के
मध्य युग का भारत 56 देशो का समूह था, ये कुछ सीरियस इतिहासकार भी
चिन्हित करते है (Studies in the Geography of Ancient andMedieval India- D.C. Sircar)| पर वो सभी देश मिल कर इस राष्ट्र को पूर्ण
करते थे|
परन्तु न हिंदुस्थान के दुश्मन न वो इतिहासकार और न ही
हमारा आम जनमानस इस सच को समझते है की भारत कभी भी सीमाओं का नाम रहा ही नहीं|
पश्चिम में अफगानस्थान से लेकर पूर्व में अंगकोर वाट तक और
उत्तर में तिब्बत्त के पठार से लेकर दक्षिण में श्री लंका द्वीप तक कालांतर में
भारत ही रहा है| इसकी निरंतरता विभिन्न समयों पर विभिन्न रही है परन्तु एक समानता
जो हमेशा रही है वो है सनातन जीवन पद्यति (way of living) जो समय के साथ हिन्दू धर्म
बन गयी| ये सनातन धर्म ही है जो भारत को राष्ट्र के रूप में चिन्हित करता आया है, कम से
कम पिछले 7000 साल से|
पर समय की और आक्रान्ताओ की मार की वजह से य हिन्दुस्थान
पूर्व और पश्चिम में गुजरात और अरुणाचल प्रदेश तक सिमट कर रह गया| पहले तक्षशिला
और पुरुषपुर गए फिर सुंदरवन गए और अब कुछ हद तक हिमालय भी हिन्दुस्थान से अलग हो
चुके है|
ध्यान देने की बात ये है की कोशिशे अभी भी जारी है की हिन्दुस्थान
का नामो-निशान मिटाने की| प्रत्यक्ष रूप में उत्तर में कश्यप्मीर में चल रहा है
प्रोग्राम दक्षिण में केरला में| पूर्व में असम में भी वही हाल हैं| परोक्ष
रूप में पूरे भारत में चल रहा है (पढ़े Breaking India by Rajiv Malhotra)|
सवाल है किया क्या जाए इस पर?
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