Thursday, 25 February 2016

महाभारत- एक सीख

कुछ लोग ये मानते हैं की महाभारत एक मिथक है| मैं नहीं मानता| मैं इसे इतिहास मानता हूँ| भारत का इतिहास|
और इतिहास हमें बहुत कुछ सिखाता है| हमें अपने इतिहास से सीख लेनी भी चाहिए| क्यूंकि उससे क्या गलत है, और क्या नहीं करना है उसका ज्ञान मिलता है| महाभारत ऐसी शिक्षाओं का सागर है| भगवद गीतोपदेश इनमे सबसे बड़ी शिक्षा है|
परन्तु आज मैं भगवद गीता की बात नहीं कर रहा| आज जो मैंने सिखा है महाभारत से वो लिख रहा हूँ| वो है- "योग्य ही सर्वोच्च हो"
महाभारत में जिस क्षण महाराज शान्तनु से सत्यवती के विवाह के लिए देवव्रत ने अपना हिस्सा सिंहासन से छोड़ कर, सत्यवती के पुत्रो को ही राजा होने की भीष्म प्रतिज्ञा की, उसी क्षण युद्ध निश्चित हो गया था| क्यूंकि उसी क्षण भारत में सर्वोच्चता योग्य की न होकर जन्म से निर्धारित हो गयी| 
सत्यवती के पुत्र चाहे योग्य हो न हो, भीष्म ने ये सुनिश्चित करने का वचन दिया की राजा वही होंगे, बाद में इसकी ग्लानी सत्यवती को भी हुई पर देर हो चुकी थी| और इसी के परिणामों के कारण से महाभारत युद्ध भी हुआ| 
आज के परिपेक्ष में देखा जाए तो राजनीती की सभी बुराइयो की जड़ में भी ये ही है| लोग राजनीती को धर्म न मान कर एक कर्म (पेशा) मानते है| और योग्य को बढ़ावा न देकर अपनी संतानों को बढ़ावा दिया जाता है फिर चाहे वो योग्य हो या अयोग्य| अब यदि अयोग्य को सर्वोच्च बनाया जाएगा तो वो वहां बना रहने के लिए अधर्म करेगा ही| 

Moral- If you are looking for creating something long term promote able and deserving rather than your descendants.  




Saturday, 20 February 2016

भारत एक राष्ट्र

ये हमारा राष्ट्र जिसे मध्य एशियन्स के ‘स’ को ‘ह’ उच्चारित करने की वजह से हिन्दुस्थान भी कहा जाता है| इसे परंपरागत सीमओं ने कभी भी परिभाषित नहीं किया| जो लोग इसको विभिन्न छोटे छोटे देशो का एक समूह मानते हैं वे कुछ हद तक सही हैं| असल में मौर्य सम्राज्य के विघटन के बाद के मध्य युग का भारत 56 देशो का समूह था, ये कुछ सीरियस इतिहासकार भी चिन्हित करते है (Studies in the Geography of Ancient andMedieval India- D.C. Sircar)| पर वो सभी देश मिल कर इस राष्ट्र को पूर्ण करते थे|

परन्तु न हिंदुस्थान के दुश्मन न वो इतिहासकार और न ही हमारा आम जनमानस इस सच को समझते है की भारत कभी भी सीमाओं का नाम रहा ही नहीं|
पश्चिम में अफगानस्थान से लेकर पूर्व में अंगकोर वाट तक और उत्तर में तिब्बत्त के पठार से लेकर दक्षिण में श्री लंका द्वीप तक कालांतर में भारत ही रहा है| इसकी निरंतरता विभिन्न समयों पर विभिन्न रही है परन्तु एक समानता जो हमेशा रही है वो है सनातन जीवन पद्यति (way of living) जो समय के साथ हिन्दू धर्म बन गयी| ये सनातन धर्म ही है जो भारत को राष्ट्र के रूप में चिन्हित करता आया है, कम से कम पिछले 7000 साल से|

पर समय की और आक्रान्ताओ की मार की वजह से य हिन्दुस्थान पूर्व और पश्चिम में गुजरात और अरुणाचल प्रदेश तक सिमट कर रह गया| पहले तक्षशिला और पुरुषपुर गए फिर सुंदरवन गए और अब कुछ हद तक हिमालय भी हिन्दुस्थान से अलग हो चुके है|

ध्यान देने की बात ये है की कोशिशे अभी भी जारी है की हिन्दुस्थान का नामो-निशान मिटाने की| प्रत्यक्ष रूप में उत्तर में कश्यप्मीर में चल रहा है प्रोग्राम दक्षिण में केरला में| पूर्व में असम में भी वही हाल हैं| परोक्ष रूप में पूरे भारत में चल रहा है (पढ़े Breaking India by Rajiv Malhotra)|

सवाल है किया क्या जाए इस पर?